ज्योतिष और ग्रहण भाग – 5

गतांक से आगे

वैशाख मास में ग्रहण का फल

यदि वैशाख मास में ग्रहण हो तो इक्ष्वाकु वंश के लोग, सैनिक, पठान देश व कलिंग के लोगों का विनाश होता है या विपत्ति आती है । इस ग्रहण में वर्ष भर में फसलें अच्छी होती हैं परंतु कपास, तिल, मूंग आदि दालों का अभाव होता है।

जेष्ठ मास में ग्रहण का फल

जेष्ठ मास में ग्रहण होने पर राजा जनउनकी पत्नियों, ब्राह्मणों, प्रसिद्ध व्यक्तियों, साल्व देशवासियों व निषादों को कष्ट होता है । साथ ही देश में राजनीतिक स्तर पर बड़े परिवर्तन होते हैं।

आषाढ़ मास में ग्रहण का फल

यदि आषाढ़ माह में ग्रहण हो तो, कहीं पानी का संकट होता है तो कहीं नदियों में  बाढ़ आती है । बांध टूट जाते हैं तथा नदियां अपना मार्ग बदल लेती हैं ।  फल सब्जियां बेचने  या उगाने वाले किसानों को विशेष कष्ट होता है। कश्मीर व चीन देश में संकट उठ खड़े होते हैं।

श्रावण मास में ग्रहण का फल

श्रावण मास में ग्रहण हो तो काश्मीर, मेघालय, नागालैंड, भूटान, चीन, यमन देश, कुरुक्षेत्र, काबुल, मध्य प्रदेश आदि स्थानों पर उपद्रव होता है। अन्य जगहों पर सुख – शांति, समृद्धि रहती है।

भाद्रपद के ग्रहण का फल

भाद्रपद मास में ग्रहण होने पर मगध देश, सौराष्ट्र या राजस्थान  प्रदेश  की स्त्रियों को पीड़ा होती हैं या उनके गर्भों का नाश होता है। वर्षा ठीक होने के कारण फसलें अच्छी होती हैं।

अश्विनी मास में ग्रहण का फल

यदि अश्विनी मास में ग्रहण हो तो चीन ,यमन देश, सिंधु नदी के तटीय प्रदेश, किरात देश आदि को कष्ट होता है। शल्य चिकित्सक वर्ग पीड़ित होता है परंतु अन्न की बहुलता रहती है।

कार्तिक मास में ग्रहण का फल

कार्तिक मास में ग्रहण हो तो अग्निजीवी  लोगों को कष्ट होता है। सुनार, लोहार, बेकरी, पटाखा, बिजली, दियासलाई, तेजाब, पेट्रोल, तेल, गैस आदि से जीविका कमाने वालों को विशेष कष्ट होता है। मगध देश, अयोध्या, मथुरा व काशी के लोगों को पीड़ा होती है।

मार्गशीर्ष मास में ग्रहण का फल

मार्गशीर्ष मास में ग्रहण होने पर काश्मीर प्रदेश, कौशल प्रदेश, वनप्रदेश, सीमा प्रदेश के लोगों को कष्ट होता है । जंगली जानवर व यज्ञ करने वाले लोग पीड़ा पाते हैं । परंतु वर्षा अच्छी होती है जो सुभिक्ष की सूचक है।

पौष मास में ग्रहण का फल

इस मास में ग्रहण होने पर ब्राह्मणों व क्षत्रियों को कष्ट होता है। सिंध प्रदेश, उत्तरी काठियावाड़मिथिला में उपद्रव होता है । वर्षा कम होती है एवं अकाल होता है।

माघ मास में ग्रहण का फल

इस माह में ग्रहण होने से बंगाल, उड़ीसा का सीमावर्ती भाग व काशी के लोगों को कष्ट होता है। माता पिता के भक्त जन, विद्यार्थियों,वशिष्ठ गोत्र के लोगों को पीड़ा पहुंचती है। किसानों के लिए यह शुभ रहता है।

फाल्गुन में ग्रहण का फल

फाल्गुन मास का ग्रहण अभिनेताओं, नर्तकों, नाटक कारों, गायको, सैनिको, शिल्पीकारों, स्त्रियों, क्षत्रियों व मुनि जनों को कष्ट देता है। पर्वतीय प्रदेश के लोगों को पीड़ा होती है।

ग्रहण से सप्ताह के भीतर होने वाले उत्पात का फल

1. ग्रहण के सप्ताह के भीतर धूल भरी आंधी चले तो अकाल होने की संभावना रहती है।

2. कोहरा छाए तो रोग भय होता है।

3. भूकंप आने से देश के किसी प्रधान पुरुष की मृत्यु की संभावना होती है।

 4. सप्ताह के भीतर उल्कापात हो तो मंत्री गणों का नाश होता है।

5. रंग-बिरंगे बादलों के होने से अनेक प्रकार का भय होता है।

6. बादलों की गड़गड़ाहट हो तो वर्षा की कमी रहती है।

7. बिजली कड़कने से राजा को पीड़ा होती है।

8. तेज आंधी, हवा चले तो चोरों से भय होता है।

9. इंद्रधनुष  के दर्शन से शत्रु द्वारा आक्रमण की संभावना होती है।

10. सप्ताह के भीतर सामान्य वर्षा से ग्रहण से होने वाले अशुभ फल शांत हो जाते हैं।

एक महीने में तीन ग्रहण का फल

वर्ष भर में चार या अधिक से अधिक पांच ग्रहण ही लगते हैं । परंतु यह घटना दुर्लभ होती है । जब भी ऐसा हो तो किसी भयानक उत्पात का संकेत माना जाता है। इसके साथ ही यदि पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण के पश्चात आने वाली अमावस्या को सूर्य ग्रहण लगे तो प्रजा जनों को अनीति व अन्याय से पीड़ा होती है। पति पत्नियों में प्रेम की कमी रहती है। जिस ग्रह के नक्षत्र में ग्रहण हो उससे संबंधित देशों में युद्ध या उपद्रव होता है। ग्रहण का प्रभाव एक से छे महीने तक रहता है।

Dr. Meena Sharma

Astrology Expert | Astro Teacher | Life Coach | Chandigarh, India