ज्योतिष और ग्रहण, भाग – 4

गतांक से आगे:-

मिथुन राशि

मिथुन राशि में यदि ग्रहण हो तो प्रसिद्ध स्त्री पुरुषों, राजा व राजा समान लोगों, कलाकार आदि को कष्ट होता है।

कर्क राशि

कर्क राशि में ग्रहण होने से वनवासी, आदिवासी लोगों को कष्ट तथा अन्न की कमी होती है।

सिंह राशि

सिंह राशि में विशिष्ट गण समूह, पार्टियों, दलोंदबंग लोगों, राजसी तथा जंगल में रहने वाले लोगों को पीड़ा होती है।

कन्या राशि

कन्या राशि में ग्रहण होने से विद्वान, कवि, लेखक, गायक व धान की फसल पैदा करने वाले लोगों को कष्ट होता है।

तुला राशि

तुला राशि में ग्रहण होने से पड़ोसियों, पड़ोसी राज्यों, सज्जनों व व्यापारी वर्ग को कष्ट होता है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि में वृक्ष, रसायन या विष का प्रयोग करके जीविका कमाने वाले लोगों को पीड़ा होती है।

धनु राशि

धनु राशि में ग्रहण हो तो वैद्य, चिकित्सकों, क्रूर लोगों तथा हथियारों की तकनीकी जानकारी रखने वालों को कष्ट होता है।

मकर राशि

मकर राशि में मछलियों, जल में रहने वाले जीवों, मंत्रियों व उनके परिवारों, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों, तांत्रिकों तथा वृद्धों को कष्ट होता है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि में ग्रहण होने से मजदूरों, कुलियों, तस्करों व पर्वतीय लोगों को कष्ट होता है।

मीन राशि

मीन राशि में जंगली जीवों, समुद्री पदार्थों से धन कमाने वाले मछुआरे, नाविकों को, मर्चेंट नेवी तथा जल बेचने वालों को कष्ट होता है।

ग्रहण के समय ग्रहों की दृष्टि का फल

सूर्य चंद्र ग्रहण पर यदि मंगल की दृष्टि हो तो युद्ध,अग्निभय  तथा तस्कर भय होता है।

बुध की दृष्टि से  धृत, मधु ,तेल व राजा का क्षय अथवा हानि होती है।

ग्रहण के समय गुरु की दृष्टि होने पर अन्य ग्रहों की दृष्टि से होने वाले अशुभ फल समाप्त हो जाते हैं।

शुक्र की दृष्टि ग्रहण के समय होने से नाना प्रकार के क्लेश व फसलों का नाश होता है।

ग्रहण के समय यदि शनि की दृष्टि हो तो वर्षा की कमी, अकाल व चोरों का भय होता है।

सूर्य चंद्रमा ग्रहण में ग्रस्त ग्रह का फल

यदि कोई ग्रह  ग्रहण के समय पात बिंदु के आसपास सूर्य चंद्रमा से निकट हो तो उस ग्रह को भी ग्रहण से ग्रस्त माना जाता है। किसी भी ग्रह के ग्रस्त होने पर उस ग्रह से संबंधित सभी देशकाल, पदार्थों आदि पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

मंगल ग्रह

मंगल ग्रह यदि ग्रहण से ग्रस्त हो तो मंगल के अधीन देश , प्रदेश जैसे मध्य प्रदेश, नर्मदा, गोदावरी, गंगा आदि नदियों के निकटवर्ती प्रदेश आंध्र प्रदेश, कोंकण, केरल, नासिक, विंध्याचल का निकटवर्ती भूभाग आदि के लोगों को कष्ट होता है। घमंडी राजा द्वारा पीड़ित किसान, अग्नि व शास्त्रों आदि का व्यवसाय करने वाले लोगों को हानि, सन्यासी भिक्षु पर अत्याचार होते हैं।

बुध ग्रह

बुध ग्रह यदि ग्रहण से ग्रसित हो तो गंगा यमुना के बीच के प्रदेश , सरयू नदी के आसपास के प्रदेश, नेपाल, पूर्व में बंगाल की खाड़ी के आस पास वाले प्रदेश, मथुरा का पूर्वार्ध, हिमालय, चित्रकूट पर्वत, पर्वत वासी लोगों आदि  के बालकों व विद्वानों को कष्ट होता है। कलाकार, शिल्पकार, अर्ध सैनिक बल आदि को पीड़ा होती है।

बृहस्पति ग्रह

बृहस्पति ग्रह ग्रहण से ग्रसित होने पर उतरी भारत, मथुरा का पश्चिमी भाग, व्यास नदी के आसपास का क्षेत्र, सरस्वती नदी का प्रदेश आदि में विशेष उपद्रव होते हैं । विवाह आदि मंगल कार्य में विघ्न पड़ते हैं । पुरोहित व शास्त्रज्ञ विद्वान, उच्च शिक्षित लोग आदि कष्ट पाते हैं ।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह ग्रहण से ग्रस्त होने पर दशरक प्रदेश, कैकेय प्रदेशआर्यावर्त शिवि प्रदेश आदि की स्त्रियों, सचिवों, मंत्री गण आदि को कष्ट होता है और व्यभिचार बढ़ता है। छोटे-मोटे व्यापारी, बर्तन बनाने वाले, औषधि बनाने वाले लोग आदि को हानि होती है।

शनि ग्रह

यदि शनि ग्रह  भी सूर्य या चंद्र ग्रहण के साथ ही ग्रसित हो जाए तो राजस्थानकुरुक्षेत्र , प्रयाग, तीर्थ स्थान, विदिशा, मरूभूमि के सभी पश्चिमी प्रदेश , माउंट आबू, गोवा आदि के लोगों को विशेष कष्ट होता है।

मास के अनुसार ग्रहण का फल

चैत्र मास में ग्रहण हो तो चित्रकार, लेखक, गायक , वैश्य वर्ग, अभिनेता, मॉडलिंग से  जीविका कमाने वाले, वेदांत व वेद ज्ञाताओं, स्वर्ण व्यापारियों आदि को कष्ट होता है। अस्वाभाविक रूप से वर्षा होती है। कहीं अधिक, कहीं सूखा , कहीं बाढ़ आदि

क्रमशः

Dr. Meena Sharma

Astrology Expert | Astro Teacher | Life Coach | Chandigarh, India